सही दिशा

एक पहलवान जैसा, हट्टा-कट्टा, लंबा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी स्टेशन पर उतरा। उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना

Read full story...

शिव के गण नंदी की कहानी

पौराणिक दंत कथा अनुसार, एक बार शिवजी के निवास स्थान पर कुछ दुष्ट व्यक्ति प्रवेश कर जाते हैं। इस बात का बोध होते ही शिवजी

Read full story...

भीमसेन का अभिमान

पांडु पुत्र भीम को अपनें बलशाली होने पर अत्यंत गर्व हो जाता है। वनवास काल के दौरान एक दिन वह वन की ओर विचरते हुए दूर

Read full story...

भस्मासुर को शिव का वरदान

पूर्व काल में भस्मासुर नाम का एक राक्षस हुआ करता था। उसको समस्त विश्व पर राज करना था। अपने इसी प्रयोजन को सिद्ध करने हेतु वह

Read full story...

जनमेजय का “सर्प मेघ यज्ञ”

एक बार राजा परीक्षित किसी तपस्वी ऋषि का अपमान कर देते हैं। ऋषिवर क्रोधित हो उन्हें सर्प दंश से मृत्यु का श्राप दे देते हैं।

Read full story...

कायम हुई गांव की एकता

दोस्तों,यह मेरे गांव तारापुर की एक दिलचस्प कहानी है । हमारा गांव शांति , एकजुटता और एकता जैसी कई विशेषताओं के लिए पूरे इलाके में

Read full story...

चिंटू और चीनी

चिंटू और चीनी भाईबहन थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे इसलिए एकसाथ आतेजाते थे।चिंटू और चीनी के स्वभाव बिलकुल भिन्न थे। चीनी सीधीसादी

Read full story...

महातप नामक सन्यासी और एक चूहे की कहानी

गौतम महर्षि के तपोवन में महातपा नामक एक मुनि था। वहाँ उस मुनि ने कौऐ से लाये हुए एक चूहे के बच्चे को देखा। फिर

Read full story...

भाग्य से ज्यादा और समय से पहले, न किसी को मिला है और न मिलेगा।

एक सेठ जी थे जिनके पास काफी दौलत थी और सेठ जी ने उस धन से निर्धनों की सहायता की, अनाथ आश्रम एवं धर्मशाला आदि

Read full story...

दूसरों के हितों के खातिर तोड़ी मूर्ति

राजा महेंद्र कीर्ति विद्वतजनों का बहुत सम्मान किया करते थे । उनके दरवार में दूर -दूर से चित्रकार,मूर्तिकार लेखक, कवि आदि आते है और अपनी

Read full story...

दत्तात्रेय की प्रेरणा

कृतवीर्य हैहयराज की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अर्जुन का राज्याभिषेक होने का अवसर आया , तो उन्होंने राज्यभार ग्रहण करने के प्रति उदासीनता व्यक्त

Read full story...

चोर की दाढ़ी में तिनका

बादशाह अकबर बीरबल से अकसर अजीब सवाल तो पूछते ही थे लेकिन एक दिन उन्होंने बीरबल को छकाने की एक तरकीब खोज निकाली। उन्होंने अपनी

Read full story...

मारीच

एक बार अयोध्या में गाधि-पुत्र मुनिवर विश्वामित्र पधारे। उमका सुचारू आतिध्य कर दशरथ ने अपेक्षित आज्ञा जानने की उन्होंने एक व्रत की दीक्षा ली है।

Read full story...

देवी अहिल्या

प्रातःकाल राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले। एक उपवन में उन्होंने एक निर्जन स्थान देखा।

Read full story...

धर्मात्मा राजा नहुष

प्रसिद्ध चंद्रवंशी राजा पुरुरवा का पौत्र था। वृत्तासुर का वध करने के कारण इन्द्र को ब्रह्महत्या का दोष लगा और वे इस महादोष के कारण

Read full story...

पतिव्रता नारी “सावित्री”

धर्मराज युधिष्ठिर ने मार्कण्डेय ऋषि से कहा, “हे ऋषिश्रेष्ठ! मुझे अपने कष्टों की चिन्ता नहीं है, किन्तु इस द्रौपदी के कष्ट को देखकर अत्यन्त क्लेश

Read full story...

देवराज इन्द्र और प्रह्लाद

प्राचीन भारतीय साहित्य में प्रह्लाद की कथा आती है, जो इसका महत्त्व बताती है। राक्षसराज प्रह्लाद ने अपनी तपस्या एवं अच्छे कार्यों के बल पर

Read full story...

महात्मा रैक्व की कथा

जनश्रुति नामक वैदिक काल में एक राजा थे। वे बड़े उदार ह्रदय तथा दानी थे। सारे राज्य में जगह-जगह पर उन्होंने धर्मशालाएं बनावा रखी थीं

Read full story...